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देवी देवताओं को पूजा पाठ में नारियल क्यों चढ़ाया जाता है ? /Why are coconut offered to Gods and Goddesses in worship ?

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नमस्कार मित्रों ,                         मैं जितेन्द्र सकलानी एक बार पुन: प्रस्तुत हुआ हूँ आप लोगो के समक्ष अपने नए ब्लॉग के साथ अपने धर्मग्रंथो पर आधारित कुछ बताये गए  वाक्य, अथवा नियमो के विषय में कुछ जानकरी लेकर.... मित्रों यदि आप कभी कंही किसी भी हिन्दू मंदिर में दर्शन करने गए होंगे तो आपने एक चीज पर जरूर गौर किया होगा की वंहा उस मंदिर में प्रसाद के तौर पर चढाने के लिए नारियल अवश्य ही मिला होगा ! पर क्या हिन्दू मंदिर में उस नारियल चढाने की परम्परा को देख कर आपके मन में भी कभी यह ख्याल आया है की आखिर मंदिरों में देवी देवताओं को पूजा पाठ में नारियल क्यों चढ़ाया जाता है ?  अगर आपके मन में भी आया है यह सवाल तो जवाब लेकर मैं उपस्थित हूँ आइये जानते हैं - प्रायः सभी देवी - देवताओं को नारियल चढ़ाने की परम्परा है । कलश पूजन में नारियल पर रोली की छींटे देकर कलश मुख पर रखा जाता है । इसे मंगलसूचक , समृद्धिदायी व सम्मान सूचक माना गया है । नारियल भगवान शिव का परमप्रिय फल माना जाता है । इसमें बनी तीन आंखों की आकृति को त्रिनेत्र...

जानिए हमारे शास्त्रों में प्रेम विवाह की अनुमति क्यों नहीं है?

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वर्तमान वैज्ञानिक युग में मनुष्य भौतिक संसाधनों की चमक - दमक में इस प्रकार अंधा हो गया है कि अपने प्राचीन आत्मिक सौन्दर्य को नजरअन्दाज करके बाहरी चमक - दमक एवं शारीरिक सौन्दर्य पर आकर्षित होकर प्रेम विवाह को अधिक महत्व देने लगा है । आज की नई शिक्षा पद्धति एवं संचार के नवीन माध्यमों से नया शिक्षित वर्ग पूर्ण रूप से गंधर्व विवाह ( प्रेम विवाह ) को मान्यता देने लगा है ।           आज अनेक विद्वान एवं धर्माचार्य भी इसकी वकालत में जुट गए हैं और तर्क दे रहे हैं कि विवाह से पूर्व स्त्री - पुरुष के बीच आपसी प्रेम , मेल - मिलाप होना आवश्यक है । जब वे आपस में पूर्ण रूप से परिचित हो जाएं , एक - दूसरे को पूर्ण रूप से जान लें तभी उन्हें विवाह सूत्र में बंधना चाहिए । इस प्रकार लोगों में यह एक धारणा बन गई है कि जब दो विपरीत लिंगियों में प्रेम हो गया है तो दोनों का विवाह होना ही चाहिए । ब्राहा विवाह ही पूर्वकाल में शास्त्रसम्मत विवाह पद्धति कही गई थी । अध्यात्म प्रधान आर्य जाति के विवाह सिद्धान्तानुसार स्त्री और पुरुष दोनों का विवाह सम्बन्ध अभिभावकों की अनुमति ए...